Monday, 11 April 2011

गायब हो रहें रेडियों, बढ़ रहा टीवी देखने का शौक

( रिसर्च )
रायपुर शहर व गांव मे किये लघु  शोध से खुलासा
रायपुर, कभी मनोरंजन का प्रमुख पर्याय समझा जाने वाला रेडियों अब टीवी के चकाचौंध में विलुप्त होने के कगार में हैं। पहले जहां लोग घरों पर ट्रांजिस्टर रखना षान समझते थे वहीे  नये जमाने के साथ अधिकांष दिखावटी दंुनिया अर्थात टीवी के दीवाने बनते जा रहे हैं। ग्रामीण जिसे रेडियों का मुख्य श्रोता माना जाता है आज के दौर में वही ग्रामीण रेडियो को भूलकर टीवी की दुनिया में खो चुके हैं।उनके घरों में रेडियो सेटस बीते जमाने की बात हो गई है।कभी मनोंरंजन का साधन रहा रेडियों कब का कूडे़ में जा चुका है। संचार क्रांति का ग्रामीण खुलकर फायदा उठाते हुए संचार के नये साधनों का उपभोग मनोरंजन की दिशा  में कर रहे हैं। एफएम के दौर में शहरियों का  भी  शौक रेडियो के प्रति नही रहा।घर से बाहर या काम करते वक्त मोबाइल से गाना तो सुना जाता है लेकिन बहुत कम समय के लिए,टीवी हर घर में है और शहर की महिलाये सीरियल अधिक देखती है जबकि षहरी पुरूष सूचना हासिल करने के लिए समाचार देखना पसंद करते है।बच्चे कार्टून,फिल्म,युवा वर्ग गाने ,खेल,एवं सीमित मनोरंजन से जुड़े अन्य प्रसारण देखते है।
यह खुलासा हुआ है पत्रकारिता के छात्र व वर्तमान में पत्रकार तथा शासकीय इ.वि.स्नातकोत्तर महाविद्यालय कोरबा में सहायक प्राध्यापक कमल ज्योति द्वारा किये गये लघुषोध प्रबध्ंा से। रायपुर शहर व ग्रामीण क्षेत्र  में कमल ज्योति जाहिरे ने रेडियों,टीवी श्रोताओं ,दर्षकों द्वारा कार्यक्रमों के लिए दिए जाने वाले समय का तुलनात्मक अध्य्यन विषय में लघुषोध कार्य किया। तथ्यों के संग्रहण के लिए शहर  हेतु राजधानी रायपुर के मोवा एलआईसी कालोनी,रामकुंड रायपुरा,अष्वनी नगर ,आदअर्श  नगर,पंडरी, कालीनगर, लोधीपारा के लोगो को अध्ययन में षामिल किया गया। ग्रामीणों के लिए रायपुर जिले के ग्राम पंचायत आमासिवनी व कचना के भाठापारा,साहू नगर, सत्यम नगर,प्रेम नगर आदि का चयन किया गया। कुल 250 लोगो पर किये गये अध्ययन में उत्तरदाताओं का चयन दैव निदर्षन विद्यि, साक्षात्कार अनूसूची का इस्तेमाल किया गया।विषय के अनुरूप उत्तर जानने के लिए आयु वर्ग,लिंग, शिक्षा ,कार्यक्रम, आय वर्ग,चैनल आदि खंड निर्धारित किया गया।
.शहरियों को भाता है एफएम शहरी क्षेत्र में किये गये अध्ययन से पता चला है कि 36 प्रतिशत घरों में रेडियों अब नही है। 4 प्रतिशत घरों में रेडियों है पर सुनता कोई नही है। 12प्रतिशत षहरी रेडियो अब भी सुनते है।मोबाइल से लगभग 48 प्रतिशत लोग एफएम सुनते है।  ग्रामीण क्षेत्र के अध्ययन से पता चला कि 72 प्रतिशत लोगों के पास रेडियों नही है। 8 प्रतिषत ग्रामीण रेडियों होने के बाद भी सुनते नहीं। 20 प्रतिशत ग्रामीण रेडियो सुनते है। अध्ययन सें आष्चर्यजनक रिपोर्ट यह भी पता चला कि षहर में 36 तो गावं में 72 प्रतिषत घरों में रेडियो नही है।संचार साधन टीवी की उपलब्धता,कम कीमत तथा डायरेक्ट टू होम वाले साधनों की वजह से कभी मनोरंजन का प्रमुख साधन रहा रेडियों गांव तथा ष्षहर के लोगो से दूर होता जा रहा है। विविध भारती  आज भी रेडियों रखने वाले घर में पसंदीदा बना हुआ है।
गांव व षहर में निजी चैनलों का क्रेज
चैनल अभिरूची के अनुसार किये सर्वे से ज्ञात हुआ कि रायपुर षहर क्षेत्र में दूरदर्षन 28 प्रतिशत ,निजी चैनल 56 प्रतिशत जबकि दोनों को देखने वाले 16प्रतिशतलोग है।ग्रामीण क्षेत्रों में भी कुछ यही स्थिति है। यहा भी निजी चैनलों का क्रेज है । हालांकि दूरदर्षन के भी दर्षक पर्याप्त है। ग्रामीणों में 24प्रतिशत दूरदर्षन, 36 प्रतिशत निजी अथवा प्राइव्हेट चैनल देखना पसंद करते है। लगभग 40 प्रतिशत दूरदर्षन व निजी चैनल दोनों देखते हैं। अध्ययन से पता चला है कि ष्षहर में केबल उपलब्धता व आर्थिक सम्पन्नता की वजह से डीटीएच सेवा से निजी चैनल देखे जाते है। ग्रामीणों में मनोरंजन की लालसा तेजी से बढ़ रही है। साफ प्रसारण व कम कीमत की वजह से वे भी डीटीएच जैसी सेवाओं का उपभोग कर रहे है।षहरी व ग्रामीण अपने कई मनपसंद कार्यक्रमों को देखने के लिये दूरदर्षन अभी भी देखते है।
समाचार के बहुत कम दर्षक,अन्य के अधिक
कार्यक्रम अभिरूची के तहत किये गये सर्वे से ज्ञात हुआ है कि ष्षहर व ग्रामीण क्षेत्र दोनो में समाचार के दर्षक पर्याप्त संख्या में नही है। इस श्रेणी में समाचार तथा अन्य जिसमें धारावाहिक ,फिल्म ,गाने,कार्टून ,आदि कार्यक्रम षामिल है एवं दोनो देखने वाले और कुछ भी नही देखने वाले भागों में बाटा गया है। कार्यक्रम रूचि में षहरी उत्तरदाताओं का प्रतिशत है। समाचार 7.27प्रतिशत,जिसमें महिला सिर्फ 2.3प्रतिशतहै।  कुल 43.2 प्रतिषत षहरी  है जो अन्य कार्यक्रम देखते है। दोनो कार्यक्रम को देखने वालों का प्रतिशत 47.4 है। कुछ नही देखने वालों में 2.06 प्रतिशत है।अध्ययन में सामने आया कि समाचार के प्रति ग्रामीण महिलाओं का प्रतिशत 0 है। सिर्फ 5.8 प्रतिषत  पुरूष है जो समाचार देखने मे रूचि रखते हैं। धारावाहिक,फिल्म आदि देखने वाले 64.7 प्रतिषत है। दोनो(समाचार व मनोरंजन) देखने वालों का प्रतिषत 23.5 है। कुछ नही देख पाने वाले ग्रामीणों में 5.8 प्रतिषत है।
मजबूरी में देखते है कार्यक्रम
अध्ययन के दौरान एक जानकारी यह भी सामने आई कि अनेक लोग मजबूरी में कई कार्यक्रम देखते हैं। कार्यक्रम रूचि के तहत सर्वे में पाया गया कि षहरी समाचार देखने में रूचि रखते है मगर घर में महिलाओं के धारावाहिक के प्रति लगाव  की वजह से पुरूष  मजबूरी में सीरियल देखते है। कई महिलाए समाचार पुरूषों की वजह से देखते है। ष्षहरी व ग्रामीण क्षेत्र की महिलाए सीरियल व धार्मिक कार्यक्रम पसंद करती हैं। क्रिकेट व कार्टून समेत अन्य कार्यक्रमों का प्रसारण भी महिलाओं को मजबूरी में देखना पड़ता है। ग्रामीण क्षेत्र के कई लोग अपनी व्यस्तता की वजह से कार्यक्रम नही देख पाते। अधिकांष ग्रामीण अपना कामकाज निबटाने के बाद मनोरंजन के लिये टीवी देखते है। सिर्फ युवा दर्षक है जो गाने व फिल्म अधिक देखते हैं। दूरदर्षन का चित्रहार, प्रादेषिक समाचार अनेक ग्रामीणों को अब भी पसंद है।
ष्षहरी देखते है ज्यादा देर तक टीवी
विभिन्न कार्यक्रमों के लिए टीवी में सबसे अधिक समय ष्षहरी देते है। इस श्रेणी में ग्रामीणों का प्रतिषत है। दो घंटे से कम 27.4 प्रतिषत ,दो घंटे से अधिक 45 प्रतिषत, तीन घंटे से अधिक में 21.5 और एक घंटे भी नही में 5.8 प्रतिषत लोग है।इस श्रेणी में पाया गया कि ग्रामीण बच्चे व महिलाए दो घंटें से आधिक समय रोजाना टीवी देखने में बिताते हैं। तीन घंटो से अधिक समय देने वालों मंे ज्यादातर बच्चे है।षहरी क्षेत्र में दो घंटे से कम समय देने वालों का प्रतिषत 15.4 है। दो घंटे से अधिक समय देने वालो का प्रतिषत 23.7 है।षहरी क्षेत्र में सबसे अधिक समय तक टीवी देखी जा रही है।तीन घंटे से अधिक समय देने वालों में 58.7 प्रतिषत षहरी है। एक घंटे भी समय नही दे पाने वाले लोगों का प्रतिषत 2.06 है।
लघुशोध  मे हुए शामिल
लघुषोध में ग्रामीण व ष्षहरी क्षेत्र के लोगों को पर्याप्त महत्व दिया गया।ग्रामीण क्षेत्र से 51.6 प्रतिषत पुरूष व 48.3 प्रतिषत महिला है।षहरी क्षेत्र में 55.6 पुरूष व 44.3 प्रतिषत  महिला है। षिक्षा के आधार पर उत्तर देने वाले ग्रामीणों में कालेज तक पढाई करने वालों में 7.1 प्रतिषत ,हाई व हायर सेकण्डरी 28.1,मिडिल 49.6 तथा निरक्षर 15 प्रतिषत है।षहरी उत्तरदाताओं में 54.6 प्रतिषत कालेज वाले, हाई व हायरसेकण्डरी में 29.8 मिडिल वाले 12.3 तथा निरक्षर में 3.06 प्रतिषत है।

Thursday, 10 March 2011

खबर अभी बाकी है......

हमने ठाना है...मीडिया माउथ के जरिये हम पहुचेंगे आपके पास...उन खबरों को लेकर जो हमारे और आपके लिये रखती है मायने...मगर  चंद स्वार्थ की वजह से अखबार के पन्नों में,समाचार के चैनलों में छपने या दिखने से चूक जाती है। मीडिया माउथ एक ऐसा खुला मंच होगा जहां पत्रकारिता के मिषन को इक्कीसवी सदी में बरकरार रखते हुये सामाजिक सरोकारों को निबाहने का प्रयास होगा साथ ही जनहित में बेबाक अंदाज में सच्चाई को सबके सामने रखेगा । 
हमने ठाना है...मीडिया माउथ के जरिये हम पहुचेंगे आपके पास...उन खबरों को लेकर जो हमारे और आपके लिये रखती है मायने...मगर  चंद स्वार्थ की वजह से अखबार के पन्नों में,समाचार के चैनलों में छपने या दिखने से चूक जाती है। मीडिया माउथ एक ऐसा खुला मंच होगा जहां पत्रकारिता के मिषन को इक्कीसवी सदी में बरकरार रखते हुये सामाजिक सरोकारों को निबाहने का प्रयास होगा साथ ही जनहित में बेबाक अंदाज में सच्चाई को सबके सामने रखेगा ।

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